Friday, August 31, 2018

नॉटिंग हिल कार्निवल की झलकियां

सऊदी अरब और अमरीका के बीच इतना प्रेम क्यों है? यह सवाल ऐसा ही है कि एक तानाशाह या राजा और चुने हुए राष्ट्रपति के बीच दोस्ती कैसे हो सकती है?
अमरीका लोकतंत्र, मानवाधिकार और महिलाओं के बुनियादी अधिकारों को लेकर दुनिया भर में मुहिम चलाता है, लेकिन सऊदी अरब तक उसकी यह मुहिम क्यों नहीं पहुंच पाती है.
इराक़ में तो अमरीका ने सद्दाम हुसैन की तानाशाही को लेकर हमला तक कर दिया. सऊदी अरब में भी लोकतंत्र नहीं है, मानवाधिकारों के आधुनिक मूल्य नहीं हैं और महिलाएं आज भी बुनियादी अधिकारों से महरूम हैं, लेकिन अमरीका चुप रहता है. आख़िर क्यों?
ऐसा कौन सा हित है जिसके चलते अमरीका अपने ही आधुनिक मूल्यों की सऊदी में अनदेखी कर रहा है?
जनवरी 2015 में जब सऊदी के किंग अब्दुल्लाह का फेफड़े में इन्फ़ेक्शन से निधन हुआ तो अमरीकी नेताओं ने श्रद्धांजलि की झड़ी लगी दी. तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अब्दुल्लाह की प्रशंसा में कहा था कि मध्य-पूर्व में शांति स्थापित में उनका बड़ा योगदान था.
तब के विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा कि किंग अब्दुल्लाह दूरदर्शी और विवेक संपन्न व्यक्ति थे. उपराष्ट्रपति जो बाइडन ने तो यहां तक घोषणा कर दी कि वो उस अमरीकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे जो किंग अब्दु्ल्लाह की श्रद्धांजलि में शोक जताने सऊदी अरब जाएगा.
किंग अब्दुल्लाह के निधन पर अमरीका की यह प्रतिक्रिया चौंकाने वाली नहीं थी. सऊदी अरब और अमरीका दशकों से सहयोगी हैं. इसके बावजूद अमरीका और सऊदी के सुल्तान के संबंधों में विरोधाभासों का ज़िक्र थमता नहीं है.
मानवाधिकारों को लेकर सऊदी का रिकॉर्ड काफ़ी ख़राब है, क्षेत्रीय शांति में भी उसकी भूमिका पर्याप्त संदिग्ध है. अमरीका और सऊदी की दोस्ती के बारे में कहा जाता है कि अमरीका को सऊदी के साथ की जितनी ज़रूरत अभी है उतनी कभी नहीं रही.
किंग अब्दुल्लाह के बाद उनके सौतेले भाई सलमान ने कमान संभाली. उन्होंने भी अमरीका के साथ अपने पूर्ववर्ती सुल्तान की नीति जारी रखी. यह कोई छुपी हुई बात नहीं है कि सऊदी में राजशाही है और वहां कोई विपक्ष नहीं है.
धार्मिक बहुलता जैसी बात तो दूर की है. सऊदी में की कुल आबादी में महिलाएं 42.5 फ़ीसदी हैं. शुरुआत में तो यहां महिलाओं के साथ बच्चों की तरह व्यवहार होता था. सऊदी में 'गार्डियनशिप' सिस्टम है.
इसके तहत महिलाओं को काम या यात्रा के लिए घर से निकलने की अनुमति पुरुषों से लेनी होती है. किंग अब्दुल्लाह की कुल 15 बेटियों में से चार बेटियां 13 सालों तक नज़रबंद रही थीं. ऐसा इसलिए क्योंकि इन चारों ने महिलाओं से जुड़ी नीतियों को लेकर शाही शासन की आलोचना की थी. इन चारों में से दो ने कहा था कि उन्हें ठीक से खाना तक नहीं दिया गया.
ओबामा का यह कहना कि अब्दुल्लाह ने मध्य-पूर्व में शांति स्थापना में अहम योगदान दिया था यह तथ्यों से परे है. मिस्र में जब होस्नी मुबारक के शासन के ख़िलाफ़ लोकतंत्र के समर्थन लोग सड़क पर उतरे तो किंग अब्दुल्लाह ने इसका विरोध किया था.
उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा से होस्नी मुबारक की सत्ता बचाने के लिए हस्तक्षेप करने को कहा था. दूसरी तरफ़ अमरीका होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ लोगों के आंदोलन का समर्थन कर रहा था.
किंग अब्दु्ल्लाह लंबे समय तक मिस्र की मुस्लिम ब्रदरहुड को मदद पहुंचाते रहे. सऊदी अरब क्षेत्र के शिया आंदोलनों के भी ख़िलाफ़ रहा है. उसे हमेशा लगा कि इससे ईरान का प्रभाव बढ़ेगा. जब शिया प्रदर्शनकारियों ने पड़ोसी बहरीन में तानाशाही शासन प्रणाली को चुनौती दी तो सऊदी ने अपनी सेना भेज दी.
सऊदी ने सीरिया में भी विद्रोहियों को मदद की, लेकिन यह उसी के ख़िलाफ़ गया. सऊदी अरब पर ये आरोप लगते रहे हैं कि वो इस्लामिक स्टेट की आर्थिक मदद करता है.
इतना कुछ होने के बावजूद सऊदी को अमरीका साथ क्यों देता है? वॉशिंगटन में इंस्ट़ीट्यूट फ़ॉर गल्फ़ अफ़ेयर्स में सऊदी अरब के विशेषज्ञ अली अल-अहमद का कहना है कि इसका बहुत ही आसान जवाब है- तेल.
वो कहते हैं, ''सऊदी और अमरीका कोई स्वाभाविक दोस्त नहीं हैं, लेकिन दोनों एक-दूसरे का साथ देना नहीं भूलते हैं. दोनों एक-दूसरे का फ़ायदा उठाते हैं. अमरीका को 1940 के दशक से सऊदी से सस्ता तेल मिल रहा है और यही सऊदी और अमरीका की दोस्ती का राज़ है. तेल के अलावा भी कई चीज़ें हैं, लेकिन तेल सबसे अहम है.''

Wednesday, August 29, 2018

中国企业环保数据造假

据《证券日报》报道,隶属大唐电力集团的大唐多伦煤化工有限责任公司,继前年被环保组织指出工业废物污染问题后,最近又被曝光存在违规排放污染物等问题。不仅如此,就在上个月,该公司刚刚因脱硫不达标被环保部门处罚,一年中脱硫设施停运时间高达174天。

在国企屡次身陷的“环保门”中,尤以环保数据造假这一风气最为严重。

6月中旬,环保部和发改委发布公告,对2013年脱硫数据造假的19家企业予以处罚,包括五大电力集团、中石油、神华(中国最大的国有煤炭经营公司)在内的多家“国字头”企业上榜;而且这些国企已经不是初次违规。

在这次处罚中,华润电力旗下有三家企业被通报并挂牌督办。华润集团享受着高额的脱硫电价补助,仅此次被通报的三家企业,每年享受的补助就高达一个多亿。环保部相关人员在调查中发现,这三家企业全年二氧化硫排放量合计达到了三万多吨。以沈阳华润热电公司为例,公司一年享有几千万补助,但依然出现数据造假。附近小区居民对该公司的大量二氧化硫排放深恶痛绝,称公司排气管道像“火车头冒的烟似的,气味老冲了”。

早在2013年5月份,环保部就曾对多家央企子公司的脱硫数据造假问题进行过处罚。此次上榜的一些企业,当时也位居其中。尽管对其实施了扣减脱硫电价款、经济处罚、限期整改等措施,时隔一年,这些“国字头”企业还是再次上榜。

现行规定下,数据造假成本极低,却能够带来巨大的收益。

据环保部统计,为加大对企业环保措施的监管,目前由中央和地方配置投入的污染在线监测网络资金已逾百亿元,能够监控上万个污染源。但违规企业有十多种数据造假方法,包括:修改设备工作参数、破坏采样系统等。媒体在突击检查中发现,有些企业只是临时抱佛脚,平时甚至不打开污染监测设备。更讽刺的是,这些企业还享受着数以千万的国家补贴和政策减免。

经济之声特约评论员张彬针对此现象表示,归根结底是因为我们的惩罚力度远远跟不上大气污染治理的形势。未来要加大违法成本,将环境保护跟官员的职位挂钩,甚至跟刑事处罚挂钩。

在就此问题接受采访时,山东省环保厅厅长张波说:“如果造假者面临的不仅是罚款,还会被抓、拘留、承担法律责任,将起到有力的震撼。”

Monday, August 13, 2018

中国:煤价上涨并不意味着煤炭消费反弹

六月份以来中国煤价的反弹势头令一部分人怀疑煤炭消费是否在回温。专家们也在争论这是否表示中国无法兑现气候承诺,甚至在破坏国际社会温室气体减排的努力。

绿色和平组织东亚分部的能源项目主任柳力)认为,中国早前的产量限制松动不过是稳定煤价的一种手段,与去年相比中国的煤炭开采量仍然在显著减少。中国的煤炭产量在2013年达到包括国际能源机构在内的国际社会广泛认定的煤炭峰值,此后进一步下降。

新的研究

中国煤科院战略规划研究院发布的一份新报告指出,引起最近煤价上涨的因素并非消费增加,而是国内供应减少,而这是煤炭去产能造成的。该报告作者吴立新说:“最近价格上涨的原因是政府干预造成的供应不足,而非需求增加。”

政策因素导致煤炭供应减少超过2亿吨,这迫使煤炭企业将年工作日数从330天减少到276天,产量减少了10%以上。2016年前三个季度,中国煤炭产量与消费量差距达到2.22亿吨。

7月以来席卷全国的高温造成国内电力消费的增加,进一步提高了煤价,大范围暴雨和有关部门严查车辆超载等因素也限制了煤炭的运输。

为了稳定煤价,中国政府正在采取措施恢复部分已经关停的煤炭供应。但柳力说,“尽管如此,2016的煤炭产量仍然明显低于去年,并且远低于2013的峰值水平。一旦煤价回落,政策就将自动重启减产。”

需求减少

中国煤炭消费的稳步下降已持续数年,但此轮煤价暴涨引发了煤炭消费将再次超过2013年峰值的猜测。

吴立新的研究表明,尽管出现了煤价上涨,但热电、钢铁和建材行业的煤炭需求都在逐步减少,而这几个部门占据了中国2015年煤炭消费的近八成。

从长期来看,这些产业的煤炭需求将继续下降。中国已经收紧了对热电产业的管理,该部门占全国煤炭消费的一半左右。粗钢产能在未来五年将被砍去12%到19%,这也将减少对煤炭的需求。建材产业的煤炭需求已经达到峰值,并将逐渐减少。

影响进口

尽管煤价高涨让中国煤炭进口量在连续三年下降后首次上升,但吴立新说这只是暂时的:“长远来看,中国的煤炭需求将稳定在40亿吨左右,国内供应完全可以满足。”

进口煤炭由大型油轮运到中国的沿海港口再进行分配。由于中国内河航道狭窄,油轮无法通过,只能将煤炭转移到较小的船舶上,这就增加了运输成本。随着中国加强对东南部和沿海地区煤炭消费总量的限制政策,煤炭消费向西转移,市场格局决定了煤炭进口将发生萎缩。

中国还引入了好几项措施来
控制商业煤中的硫和重金属含量。这些措施扩展到进口煤炭的报关环节,增加了出口国的经营风险。此外,从2014年开始实施的新关税率和人民币贬值也削弱了进口煤炭的价格优势。

去碳化仍将继续

去产能政策的暂时松动决不会阻碍中国的去碳化趋势。2020年的
清洁能源目标和可再生能源增效等规划都表明中国仍然在朝着去碳化与实现气候目标的方向努力。

尽管今年始料未及的煤价暴涨造成了煤炭政策的松动,但煤炭供应和进口的增加应该只是煤炭消费减少大趋势下的一个短期波动。