Friday, July 13, 2018

गुजरात के विकास मॉडल में पेंशन को तरसती विधवाएँ

गुज़रात के मालिया क्षेत्र की समाजसेवी ज्योतसना जडेजा ने बीबीसी शी की टीम से बात करते हुए कहा, "अगर इन्हें (हसीना सोता को) राज्य सरकार की विधवा पेंशन योजना से फायदा नहीं मिलना चाहिए तो किसे मिलना चाहिए?"

जुम्मावादी गांव गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में मोर्बी ज़िले की मालिया तहसील में समुद्र तट के क़रीब स्थित है.
जब बीबीसी शी की टीम ने हसीना सोता के गांव में पहुंचकर उनसे बात की तो वह कहती हैं, "अगर मुझे पेंशन मिल जाए तो मैं अपने छोटे-छोटे बच्चों को खाना देने में सक्षम हूंगी."आंखों में आंसू लिए वह बताती हैं कि अपने बच्चों को भूखे पेट सोते देखना बेहद कष्टप्रद होता है. 

राज्य सरकार के नियमों के मुताबिक़, 18 से 60 साल की सभी महिलाएं राज्य सरकार से एक हज़ार रुपए प्रतिमाह पेंशन के रूप में लेने की हक़दार हैं. इसके लिए उन्हें कलेक्ट्रेट में एक औपचारिक प्रक्रिया से होकर गुज़रना पड़ता है.हालांकि, लाल फीताशाही के चलते ऐसी महिलाओं तक सरकारी मदद नहीं पहुंच पाती. लेकिन इसकी कोशिश में लगीं महिलाओं के हाथ सिर्फ़ इंतज़ार लगता है. 

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने साल 2016 में घोषणा की थी कि उनके राज्य में विधवा पेंशन के तहत 1.52 लाख महिलाएं लाभान्वित होती हैं.उदाहरण के लिए हसीना सोता के पति की मौत 19 नवंबर, 2015 को हुई. इसके कुछ दिन बाद उन्होंने विधवा पेंशन पाने के लिए आवेदन किया. 

वह बताती हैं, "दो साल से ज़्यादा समय बीत चुका है और मैं अभी भी अपनी पेंशन का इंतजार कर रही हूं. हर बार जब भी मैं (सरकारी) ऑफिस जाती हूं तो वे लोग कहते हैं कि मुझे एक चिट्ठी भेजेंगे लेकिन अब तक मुझे कोई चिट्ठी नहीं मिली है."हसीना के मामले को लेकर बीबीसी शी की टीम ने मोरबी ज़िले के मालिया तहसील के तहसीलदार एमएन सोलंकी से संपर्क किया. 

सोलंकी कहते हैं, "जुम्मावादी गांव में ग्राम पंचायत नहीं होने की वजह से इनके आवेदन पर किसी सरपंच के हस्ताक्षर नहीं हुए थे जिसकी वजह से इन्हें इंतज़ार करना पड़ रहा था. लेकिन अब मैंने इनके आवेदन पर अपना साइन कर दिया है और सुनिश्चित करूंगा कि इन्हें पेंशन मिल जाए."जुम्मावादी एक ऐसा ख़ास तटीय गांव है जहां पर स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत नहीं है.
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने साल 2016 में घोषणा की थी कि उनके राज्य में विधवा पेंशन के तहत 1.52 लाख महिलाएं लाभान्वित होती हैं.उदाहरण के लिए हसीना सोता के पति की मौत 19 नवंबर, 2015 को हुई. इसके कुछ दिन बाद उन्होंने विधवा पेंशन पाने के लिए आवेदन किया. 

वह बताती हैं, "दो साल से ज़्यादा समय बीत चुका है और मैं अभी भी अपनी पेंशन का इंतजार कर रही हूं. हर बार जब भी मैं (सरकारी) ऑफिस जाती हूं तो वे लोग कहते हैं कि मुझे एक चिट्ठी भेजेंगे लेकिन अब तक मुझे कोई चिट्ठी नहीं मिली है."हसीना के मामले को लेकर बीबीसी शी की टीम ने मोरबी ज़िले के मालिया तहसील के तहसीलदार एमएन सोलंकी से संपर्क किया.


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