Wednesday, September 5, 2018

जोसेफ़ीन और नेपोलियन

जोसेफ़ीन के पति को रॉब्सपियर ने सूली पर चढ़ा दिया था. वो किसी दौर में फ्रांस के सबसे ताक़तवर शख़्स रहे पॉल बारा की रखैल रह चुकी थीं. जोसेफ़ीन, नेपोलियन से कई साल बड़ी थी. नेपोलियन उन्हें टूटकर प्यार करते थे. लेकिन जोसेफ़ीन के लिए ये शादी महज़ मौक़ा परस्ती थी.
पॉल के छोड़ देने के बाद उन्होंने सिर्फ़ सहारे के लिए नेपोलियन का हाथ थामा था. शादी के दो दिन बाद नेपोलियन इटली रवाना हो गए थे. उन्हें इटली में सेना का कमांडर बनाया गया था. जब उन्होंने मुआयना किया तो सेना को बेहद कमज़ोर हालत में पाया. इसके बावजूद उसने कई जंगों में जीत हासिल की.
आख़िर में वो उत्तरी इटली के बेताज बादशाह बन गए थे. अब उन्हें राज करना आ गया था. वो समझने लगे थे कि कैसे लोगों से काम कराया जाए. कैसे संविधान बनाया जाए. एक साल के भीतर नेपोलियन की शोहरत नई ऊंचाई छूने लगी थी. इटली में नेपोलियन के अच्छे दिन बीते. उस वक़्त सिर्फ़ ब्रिटेन ही था जो फ्रांस के विरोध में था.
साल 1798 में नेपोलियन ने मिस्र पर हमला बोल दिया. वो भारत और ब्रिटेन के बीच का रास्ता रोक कर ब्रिटेन को घुटने टेकने पर मजबूर करना चाहते थे. साथ ही वो पूर्वी दुनिया में फ्रांस के साम्राज्य का विस्तार भी करना चाहते थे. लेकिन नेपोलियन का ये सपना साकार नही हुआ.
  लेकिन इमैनुअल और नेपोलियन ने उस वक़्त की सरकार का तख़्ता पलट करके सत्ता अपने हाथ में ले ली. अब नेपोलियन यूरोप के सबसे ताक़तवर देश के अगुवा बन चुके थे. सत्ता के शिखर पर पहुंचने के बाद पूरे यूरोप में नेपोलियन का डंका बज रहा था. एक तरफ़ तो वो जंग के मैदान में कामयाबी के झंडे बुलंद कर रहा था.
तो, दूसरी तरफ़ उसने प्रशासनिक सुधार की ऐसी हवा चलाई जो आज तक मिसाल बनी हुई है. 1802 तक नेपोलियन ने यूरोप में शांति बहाल कर ली थी. ऑस्ट्रिया को इटली के मोर्चे पर शिकस्त दी जा चुकी थी. वहीं जर्मनी और ब्रिटेन ने फ्रांस की ताक़त देखकर समझौता करने में ही भलाई समझी.ग से फ़ुरसत पाने पर नेपोलियन ने क्रांति के बाद के फ्रांस की नींव रखी. उन्होंने लोगों को निजी आज़ादी का अधिकार दिया. लोगों को अपनी पसंद का धर्म मानने का अधिकार दिया. नेपोलियन ने ही

क़ानून के सामने सब को बराबरी के अधिकार के सिद्धांत की बुनियाद रखी. इस दौरान उन्होंने फ्रांस में सबसे ताक़तवर सेना भी तैयार की.
इन कामयाबियों के चलते नेपोलियन को ज़िंदगी भर के लिए कॉन्सुल यानी सत्ता के बड़े अधिकारी की पदवी दी गई. लेकिन, यूरोप में लंबे वक़्त तक अमन क़ायम नहीं रह सका. फ्रांस की अंदरूनी खींचतान और दूसरे देशों से युद्ध के चलते हालात ऐसे बने कि नेपोलियन को फ्रांस के बादशाह का पद संभालना पड़ा. की सरकार के विरोधी दो लोगों ने नेपोलियन की हत्या की साज़िश रची. जब इसका पर्दाफ़ाश हुआ, तो नेपोलियन को लगा कि जब तक राजशाही नहीं होगी, तब तक फ्रांस में अमन क़ायम नहीं हो सकता. तब 1804 में उसने पोप की मौजूदगी में ख़ुद को बादशाह घोषित कर दिया.
फ्रांस का राजा बनने के एक साल बाद यानी 1805 में नेपोलियन ने अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी जंग जीती. ये युद्ध आज के चेक रिपब्लिक में ऑस्टरलित्ज़ में हुआ था. नेपोलियन के मुक़ाबले ऑस्ट्रिया और रूस की सेनाएं थीं. नेपोलियन ने जाल बिछाकर दुश्मन के 26 हज़ार सैनिकों को मार डाला.
होरासियो नेल्सन नाम के ब्रिटिश कमांडर ने नेपोलियन के 35 हज़ार सैनिकों को घेर लिया. वो घर भी वापस नहीं जा पा रहे थे. ब्रिटेन और रूस ने फ्रांस के ख़िलाफ़ गठजोड़ कर लिया था. फ्रांस में सरकार के नए अगुवा इमैनुअल सीस को महसूस हुआ कि सत्ता के लिए ताक़तवर सेना की ज़रूरत है.
इमैनुअल को ऐसे सेनापति की ज़रूरत महसूस हुई जो पेरिस में रहकर सरकार की हिफ़ाज़त करे. मौक़ा अच्छा देख नेपोलियन ने अपने सैनिको को मिस्र में छोड़ा और जा पहुंचे फ्रांस. जब नेपोलियन पेरिस पहुंचे तब तक फ्रेंच सेनाओं ने स्विट्ज़रलैंड और हॉलैंड में जीत हासिल कर के हालात अपने हक़ में कर लिए थे.

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